धर्मपुर विधानसभा का 400 साल पुराना किला जिसे कोई नहीं जीत सका ? आज लड़ रहा है अस्तित्व की लड़ाई!
कमलाह किले का इतिहास Kamlah fort history in hindi : मंडी जिले से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर जिले के धर्मपुर उपमंडल के कमलाह गांव में स्थित कमलाह गढ़ मंडी रियासत का सबसे मजबूत और अजयगढ़ था। किले की ऊंचाई समुद्र ताल से लगभग 4700 फुट है। यह किला हमीरपुर जिले के करीब स्थित है। किला सिकन्दर धार की रेंज के तहत आता है। किले का नाम कमलाह बाबा कमलाहिया के नाम पर पड़ा है आज भी किले के ऊपरी भाग में बना बाबा कमलाहिया का मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है।
आओ padhte है कमलाह किले का इतिहास

राजा ने रखी थी अभेद्य किले की नींव बेटे ने पूरा करवाया था निर्माण कार्य
मंडी रियासत के राजा हरी सेन जिनका शाशनकाल 1605 ईस्वी से शुरू हुआ उन्होंने राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर किला बनाने की योजना बनाई और इस पर कार्य शुरू करवा दिया, मगर राजा हरी सेन अपने जीवनकाल में इस अजय किले का निर्माण कार्य पूरा नहीं करवा पाया। राजा की मृत्यु के बाद किले के अधूरे निर्माण कार्य को उनके बेटे सूरज सेन ने 1625 ई इसे पूरा करवाया।
• मंत्री के साथ मिलकर संसारचंद ने रचा षड्यंत्र योजना रही विफल
मंडी रियासत के इस मजबूत गढ़ को हथियाने की योजना कांगड़ा के शक्तिशाली राजा संसार चंद ने बनाई थी। राजा ईश्वरी मैन के शासनकाल 1788-1826 के दौरान कमलाह दुर्ग के सेनापति मुरली और मंत्री मनकू के साथ षड्यंत्र रचकर संसार चंद ने इस दुर्ग पर कब्जा करने का प्रयास किया, मगर मंडी राज्य के वफादर सैनिक भाग को इसका पता चल गया और उसने चंद की योजना को विफल कर दिया।
सिख राजा की सेना ने किया कब्जा लेकिन दो महीने ही किला छोड़ कर भागना पड़ा
हिमाचल के धर्मशाला जिले के लेखक श्री विनोद हिमाचली द्वारा लिखी पुस्तक मंडी राज्य की कहानी” के अनुसार 1840 ई. में कर्नल राजा रणजीत सिंह उन के सैनिक वेंचुरा जो जर्मनी का था, ने इसे 2 माह के कठिन प्रयास के बाद कब्जे में किया कर लिया था, लेकिन कुछ दैवीय अपशकुनों के कारण वे किला छोड़कर भाग गए था। 1845 में मंडी के राजा बलबीर सेन ने यह किला अंग्रेजों को मदद से सिख सेना से मुक्त करवाया था। 1846 ई को एक संधि के अनुसार यह किला ब्रिटिश सरकार के अधीन मंडी रियासत का गौरव बना।
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• किले में अभी भी मौजूद है राजाओं के समय का सामान
राजकाल के दौरान का बहुत सा सामान आज भी मौजूद है उस में से अधिकांश सामान आजादी मिलने के दौरान यहां से मंडी मुख्यालय पहुंचा दिया गया था कुछ सामान लोगों की मांग पर निशानी के बतौर किले में ही रख लिया गया था उन में राजा के ज़माने की पत्थर की बड़ी बड़ी चकियाँ, राजा के ज़माने की तोफें इत्यादि है।
Kamlah fort ऐतिहासिक स्मृतियाँ
- रानी का गुफा
- हवामहल
- राजाओं के जमाने के प्राचीन जलाशय

इतिहास में सबसे सुरक्षित किलों में से एक था कमलाह किला
उस ज़माने यह किला इसलिए सुरक्षित माना जाता था क्योंकि किला एक चोटी पर है और यहां तक पहुंचना किसी के लिए भी संभव नहीं था क्योंकि चोटी तक पहुंचने के लिए एक ही रास्ता था और आज भी इस किले तक पहुंचने की चढ़ाई इतनी कठिन है कि यहां पहुंच पाना काफी मुश्किल भरा होता है। चारों दिशाओं पर नजर रखने के लिए किले के उपरी भाग पर एक हवामहल बना है जहाँ से दुश्मनो पर नजर रखी जाती थी। आज भी इस हवामहल से सैलानियों द्वारा आधे हिमाचल के दर्शन हिये जाते है।

दुश्मन के आने का पहले ही पता चल जाता था और किले के चारों ओर मौजूद सैनिक दुश्मनों को खदेड़ देते थे। यही कारण से कमलाह किले को सबसे सुरक्षित किला माना गया।
रानी का गुफा
कमलाह किले के भीतर बाहरी राजाओं और दुश्मनो के आक्रमण से रानी को सुरक्षित रखने के लिए एक गुफा बनाई गई थी जिसका मुख्य दवार आज भी विद्यमान है।

पढ़ते रहिये Kamlah fort history in hindi
‘हिन्दी ऑफ पंजाब हिल स्टेट’ किताब के पेज नंबर 374 में कमलाह किले का इतिहास के बारे में लिखा गया है।
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400 साल पुराना किला जिसे कोई नहीं जीत सका ? आज लड़ रहा है अस्तित्व की लड़ाई!
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के धर्मपुर विधासभा यह अभेद्य किला आज दिन प्रतिदिन खंडहर होता जा रहा है जिसे सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है और सरकार का दायित्व भी है। कमलाह किले का अस्तित्व आज खतरे में है। किले की प्राचीन दीवारें जर्जर होकर गिर रही हैं।

राजाओं के जमाने का ऐतिहासिक सामान थे का भी उचित रख रखाव नहीं किया जा रहा है। साडी ऐतिहासिक तोफें हर कहीं पड़ी है और जंग खा रही हैं। अगर इस किले को संरक्षित न किया गया तो आने वाली पीढ़ी कमलाह किले का इतिहास नहीं जान पायेगी।
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